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दुनिया का सबसे पहला किन्नर / हिजड़ा की कहानी | pahla kinner ya hijda ki kahani

दुनिया का सबसे पहला किन्नर / हिजड़ा | pahla kinner ya hijda, किन्नर या हिजड़ा का नाम तो आप सभी लोगो ने सूना ही होगा और आज इस पोस्ट में उन्ही किन्नरों की उत्पत्ति के बारे में बात करने वाले है, दोस्तों मनुष्य की तरह किन्नरों के भी दो प्रकार होते है पहला किन्नर जिन्हें किन पुरुष कहा जाता है तथा दूसरी किन्नरी जिन्हें किन्न पुरुषी कहा जाता है, इन किन्नरों का पहली बार जन्म कैसे हुआ और किन कारण से हुआ था चलिए आपको बताते है इस कहानी के बारे में.

बहुत पहले प्रजापति कर्दम के इल नाम का पुत्र था, यल इल बड़ा ही धर्तमा राजा था. एक बार राजा इल अपने कुछ सैनिको के साथ वन में शिकार खेलने गए. लेकिन कई जानवरों का शिकार करने के बाद भी राजा का मन नहीं भरा. तो वह शिकार खेलते खेलते उस पर्वत पर पहुच गए. जहाँ भगवान् शिव अपनी पत्नी देवी पार्वती के साथ बिहार कर रहे थे.

देवी पार्वती का मन प्रशन्न करने के लिए भगवान् शिव ने उस समय अपने आपको भी स्त्री बना लिया था. कहते है भगवान् शिव के स्त्री रूप धारण करते ही उस पर्वत के वन के अन्दर, की सभी पुलिंग नाम के जंतु तथा वृक्ष स्त्रीलिंग हो गए थे.

 pahla kinner ya hijda


इसलिए उस वन में शिकार खेल रहे राजा इल और उनके सारे सैनिक भी स्त्री बन गए थे. अपने आपको स्त्री के रूप में देख राजा इल को बहुत ही ज्यादा दुःख हुआ.

जब उन्हें यह पता चला की यह सब भगवान शिव की इच्छा से हुआ है तो वह और भी भयभीत हो गए तो फिर वह भगवान् शिव की शरण में जा पहुचे. तब उन्हें देख भगवान् शिव ने स्त्री बने राजा इल से कहा की पुरुष प्राप्ति  का वर छोड़कर जो भी वर चाहो मांग लो.

जब भगवान् शिव ने राजा इल को पुरुषत का वर देने से इनकार कर दिया तब राजा इल ने उनसे कोई दुसरा वरदान नहीं माँगा और देवी पार्वती को प्रसन्न करने में लग गए.

तब देवी पार्वती ने राजा इल से प्रसन्न होकर कहा कि तुम जो पुरुष प्राप्ति का वर चाहते हो उसके आधे भाग के दाता तो महादेव जी है. " मैं तुम्हे पुरुष प्राप्ति का आधा भाग ही दे सकती हूँ" यानी तुम आधा जीवन पुरुष बन कर रह सकते हो और अपना आधा जीवन तूम्हे स्त्री बनकर ही व्यतीत करना होगा. इसलिए तुम कब स्त्री रूप में रहना चाहते हो और कब पुरुष रूप में रहना चाहते हो वह मुझे बताओ.

तब राजा इल ने बड़ा ही सोचकर समझकर पार्वती जी से यह कहा कि मैं एक माह स्त्री के रूप में रहू और एक माह पुरुष के रूप में रहू.

राजा इल के यह बात सुनकर देवी पार्वती ने तथावस्तु कहते हुए, राजा इल से यह भी कहा की - जब तुम पुरुष रूप में रहोगे उस समय अपने स्त्री जीवन का तुम्हे कुछ भी याद नहीं रहेगा और जब तुम स्त्री रूप में रहोगे तब तुम्हे पुरुष जीवन का कुछ भी याद नहीं रहेगा.

इस तरह से राजा इल तो एक माह स्त्री इला और माह तक पुरुष इल होने का वरदान पा गए थे. परन्तु राजा इल के सारे सैनिक उसी तरह स्त्री रूप में रह गए थे. बताते है कि एक बार वह सारे सैनिक अपने स्त्री रूप में इला के साथ विचरण करते हुए चंद्रमा के पुत्र महात्मा बुध के आश्रम में पहुच गए थे. तब बुध जी ने उन स्त्री रूपी सैनिको से यह कहा था कि तुम सब किन्न पुरुषी इस पर्वत पर अपना निवास स्थान बना लो. आगे चलकर तुम सभी स्त्रिया किन्न पुरुष पतियों को प्राप्त करोगी. बुध की यह बात सुनकर वह सभी स्त्री रूपी सैनिक पर्वत पर रहने लगी थी.

दोस्तों किन्नरों की उत्पत्ति का पूरा विवरण वाल्मीकि रामायण के उत्तर काण्ड में बड़े ही स्पष्ट रूप से लिखा है.
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किन्नर के गुप्त अंग कैसे होते है | Kinner ke Gupt Ang kaise Hote hai ?

किन्नर के गुप्त अंग चित्र, ऐसे बहुत से लोग है जो किन्नर यानी हिजड़ो के बारे में जानना चाहते है लेकिन किसी दोस्त या जानने वाले से पूछे कि किन्नर/हिजड़ा का गुप्त अंग कैसे होता है ? तो इसका जवाब नहीं मिलता, इसलिए आज हम आपको किन्नरों के बारे में जानकारी दे रहे है. Kinner ke Gupt Ang kaise Hote hai ?

दोस्तों इस धरती पर रहने वाले सभी जीव जंतु और प्राणी को बनाने वाले भगवान ही है लेकिन भगवान के ही एक बनाये हुए वर्ग को दुनिया अपनाने को तैयार नहीं है इसलिए समाज में उन्हें सही नजर से भी नहीं देखा जाता है और वह है किन्नर यानी हिजड़ा. किन्नर के गुप्त अंग कैसे होते है ?

Kinner ke Gupt Ang kaise Hote hai ?


फिलहाल हम अपने टोपिक पर लोटते है - आज हमारे समाज में लोगो को किन्नर के गुप्तांग के बारे में जानने के बारे में बहुत जिज्ञासा होती है. इसलिए गूगल पर भी लोग सर्च करते है किन्नर के गुप्त अंग चित्र, हिजड़ा के गुप्त अंग लेकिन उन्हें इस विषय पर सही जानकारी नहीं मिल पाती है.

तो वास्तव में किन्नर के गुप्त अंग कैसे होते है इसके बारे में हम आपको जानकारी दे रहे है - तो सबसे पहले आप जान ले की किन्नर दो तरह के होते है पहला वह जो पुरुष की तरह दिखता है और दुसरा वह जो महिला की तरह दिखती है लेकिन इनके गुप्त अंग के बारे में बिना देखे कुछ भी अंदाजा नहीं लगा सकते है कि उसका स्वरूप कैसा होगा ?

वास्तव में किन्नर या हिजड़ा इंसानों की वह अवस्था है जब गर्भ में बच्चे के शरीर के विकास कर्म किसी एक लिंग का निर्धारण होते होते विकास प्रक्रीया रुक जाता है या कुछ समय बाद दुसरे लिंग का विकास होने लगता है.

इस तरह हिजड़े या किन्नर के अंगो में पुरुष या स्त्री के अंग या तो विकसित रूप में होते है या फिर दोनों लिंगो का मिलावट हो जाता है.

किन्नर के गुप्त अंग पुरुष या महिला के गुप्त से मिलते जुलते है लेकिन यह अविकसित रूप में होते है इसलिए इन्हें किन्नर का नाम दिया जाता है.

तो दोस्तों आज आपने जाना किन्नर के गुप्त अंग कैसे होते है ? अधिक जानकारी के लिए युट्यूब चैनल को सबस्क्राइब कर सकते है.
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15 अगस्त स्पेशल

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